गौचर (चमोली) राज्य का प्रसिद्ध गौचर मेला शुरू हो चुका है। औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मेले का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभारंभ किया। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में हर रोज कई आयोजन होते हैं। गढ़वाल मंडल के बड़े मेलों में शामिल इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा हासिल है। उत्तराखंड के चमोली जिले में आयोजित हो रहे ऐतिहासिक गौचर मेले (Gauchar Mela 2025) में लोगों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष यह 73वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला है।
स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और दूर-दराज से आए लोगों में मेले को लेकर भारी उत्साह है। लोग मनोरंजन के साथ-साथ जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को अच्छे व्यवसाय की उम्मीद है। गौचर मेला प्रदेश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक मेलों में से एक है, जो 1943 में भारत-तिब्बत व्यापार युग के समय से मनाया जाता रहा है। यह मेला संस्कृति, व्यापार और पर्यटन का एक सुंदर मिश्रण है, जिसमें कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की प्रदर्शनी और स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1943 में भोटिया जनजाति एवं अन्य लोगों की पहल पर यह मेला शुरू हुआ। जिसका शुभारंभ तत्कालीन गढ़वाल कमिश्नर बरनेडी ने किया था। तब यहां भारत तिब्बत व्यापार इस मेले के माध्यम से किया जाता था। बाद में धीरे-धीरे इसने औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का स्वरूप धारण कर लिया। अब मेले में मूल अवधारणा व्यापार को शामिल करते हुए नए आयोजन को शामिल कर दिया गया है। अब गौचर मेला सरकार की थीम लोकल टू ग्लोबल का बड़ा माध्यम बन रहा है। इस मेले में जहां पूरे प्रदेश से हस्तशिल्प, बुनकर अपने उत्पादों को लेकर पहुंचते हैं, वहीं काष्ठ शिल्प से लेकर मंडुवा, झंगोरा, तुलसी, स्थानीय दालें, चावल, फल सहित कई स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलता है।

