गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा आयोजित इगास महोत्सव के शुभ अवसर पर गढवाल भवन में दिल्ली विश्वविद्यालय के देव भूमि परिवार के छात्र -छात्रायें द्वारा उत्तराखंड के युग पुरुष व इगास पर्व के प्रतीक रहे ‘माधो सिंह भंडारी’ के जीवन पर प्रस्तुत नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध सा कर दिया। नाटक में जब लोकगीत के रूप में छात्राओं द्वारा पहाड़ का परम्परागत गीत गाया गया:-
बारा एनी बग्वाल माधो सिंगा,
सोलह ऐनी श्राद्ध माधो सिंगा।
मेरु माधो नि आई माधो सिंगा।
मेरु माधो नि आई माधो सिंगा।
दाळ दळीं रैगे माधो सिंगा।
चौंळ छड़याँ रेगें माधौ सिंगा।
मेरु माधो नि आई माधो सिंगा।
मेरु माधो नि आई माधो सिंगा।”
तो उस समय हॉल में उपस्थित दर्शकों कहीं अपनी पहाड़ की वादियों में खो से गये थे।
‘इगास महोत्सव’ के इस पर्व पर गढ़वाल भवन में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर ऐसा लग रहा था मानो पूरा पहाड़ ही गढवाल भवन में उमड़ आया हो। पूरा गढ़वाल भवन उत्सव मय हो रखा था। कहीं ढोल-दम्मो मुस्कबीन की धुन पर उत्तराखंडी परिधान में थिरकते युवा तो कहीं भैलो खेलते बुजुर्ग तो वहीं गढ़वाल भवन के भागरथी हॉल में दिल्ली विश्वविद्यालय के देव भूमि परिवार के छात्र- छात्राओं द्वारा प्रस्तुत उत्तराखंडी लोक संगीत व माधो सिंह भंडारी के जीवन प्रस्तुत नाटक का आनंद लेती भारी भीड़ तो वहीं पर सभा द्वारा व्यवस्थित इगास पर्व पर बनाये जाने वाले उत्तराखंडी पकवानों का रसास्वादन लेती जनता। समारोह में उपस्थित जनता की उमंग व उत्साह को देखकर लग रहा था कि प्रवास में रह रहे लोग अपने त्यौहारों को मनाने के लिए कितने उत्सुक व लालायित रहते हैं।
इस भव्य व दिव्य महोत्सव का सशक्त मंच संचालन सभा के महासचिव पवन कुमार मैठाणी द्वारा किया गया।
इगास महोत्सव का शुभारंभ पहाड़ की जानी-मानी व पहली फिल्म निर्देशिका व सभा सदस्या सुशीला रावत के साथ में सभा के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी, सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत, उत्तराखंडी फिल्मों के निर्माता संजय जोशी, निगम पार्षद यशपाल कैंतुरा, समाज सेवी बृजमोहन उप्रेती, उद्योगपति नरेंद्र सिंह लडवाल, ब्यूरोक्रेटस रहे ओ.पी.जोशी, साहित्यकार जबर सिंह कैंतुरा, टी.एस.भंडारी, एसीपी सतीश शर्मा, रंगकर्मी खुशहाल सिंह बिष्ट, साहित्यिकार दिनेश ध्यानी, सभा महासचिव पवनकुमार मैठाणी सांस्कृतिक सचिव वीरेन्द्र सिंह नेगी, पत्रकार व्योमेश जुगराण, पत्रकार हरीश लखेड़ा, डॉ.बिहारीला जालंधरी व जयलाल नवानी के दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत ने इस अवसर पर इगास पर्व की शुभकामनायें देते हुए कहा कि इगास हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, लोक आस्था और सामूहिक भावना का प्रतीक है। गढवाल हितैषिणी सभा अपने परंपरागत त्यौहारों को मनाते हुए उनसे जुड़े इतिहास से जनमानस को अवगत करवाने की एक सफल शुरूवात आज इगास पर्व से की है। जो कि अब अनरत जारी रहेगी।
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के देवभूमि परिवार के छात्र-छात्राओं ने परिवार के संस्थापक अमन डोभाल के नेतृत्व में उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीत व लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। इगास महोत्सव से जुड़ी वीर माधो सिंह भंडारी के जीवन पर प्रस्तुत नाटक ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और पूरा गढ़वाल भवन परिसर लोकधुनों की गूंज से सराबोर हो उठा।
सभा महासचिव पवन कुमार मैठाणी ने कहा ने कहा कि हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं, उन्हें बचाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।
समारोह में उपस्थित गढ़वाल हितैषिणी सभा के सदस्य, साहित्यकार सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रदेश के वरिष्ठ गणमालोक मान्यताओं के अनुसार परंपरागत रूप से इस गीत के साथ
सुख करी भैलो, धर्म को द्वारी, भैलो।
धर्म की खोली , भैलो जै-जस करी
सूना का संगाड़ भैलो, रूपा को द्वार दे भैलो।
खरक दे गौड़ी-भैंस्यों की भैलो, गोठ दे बाखर्यों को, भैलो
हर्रों-तर्यों करी, भैलो।
भैलो रे भैलो, खेला रे भैलो।
बग्वाल की राति खेला भैलो।
बग्वाल की राति लछमी को बास
जगमग भैलो की हर जगा सुवास
स्वाला पकोड़ों की हुई च रस्याळ
सबकु ऐन इनी रंगमती बग्वाळ
नाच रे नाचा खेला रे भैलो।
अगनी की पूजा, मन करा उजालो
भैलो रे भैलो। भेलों भी खेला। भैलो खेलते समय बुजुर्गों, मातृ शक्ति, युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखने लायक था। पूरा वातावरण पर्वतीय लोक संस्कृति की खुशियों, लोकगीतों और लोकनृत्य से सरोबार था।
सभा के सांस्कृतिक सचिव वीरेन्द्र सिंह नेगी ने इस अवसर पर कहा कि सभा द्वारा इगास महोत्सव का भव्य आयोजन करने का हमारा उद्देश्य अपनी पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना है।
इगास आयोजन को संपन्न करवाने में इगास आयोजन समिति के सदस्य सांस्कृतिक सचिव वीरेन्द्र सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह रावत, कार्यकारिणी सदस्य देवेन्द्र जोशी, विनोद नौटियाल, रेनू उनियाल, सीमा गुसांई, निर्मल कोटनाला, आनंद सिंह रावत व विकास चमोली की सराहनीय भूमिका रही।

