
नवरात्रि के प्रथम दिन विधिवत कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा काे पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। आखिर कौन हैं ये शैलपुत्री जिनकी पूजा से जीवन में स्थिरता और सुख मिलता है, जीवन की क्लेश और बाधाएं दूर होती हैं।
दरअसल ये शैलपुत्री ही अपने पिछले जन्म में सती थीं। पुराणों के अनुसार एक बार सती के पिता प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ सभी देवताओं को तो आमंत्रित किया गया, लेकिन देवादिदेव महादेव को आमंत्रित नहीं किया गया। सती अपने पति शिव के अपमान को सहन नहीं कर पाईं और स्वयं को योगाग्नि में भस्म कर डाला। इनका अगला जन्म में पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में हुआ जिसके कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
शैलपुत्री नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। इनकी सवारी बैल (वृषभ) है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित होता है। इनकी पूजा से भक्त को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
