देश-दुनिया के लिए हिमालय का बहुत बड़ा महत्व है। इसके वन जलवायु को नियंत्रित रखते हैं। गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी तमाम नदियाँ करोड़ों लोगों को जीवन देती हैं। बाँज, देवदार और बुराँश जैसे दुर्लभ ऑक्सीजन उत्पादक पेड़ हिमालय में पाए जाते हैं। औषधीय पौधों की तो यहाँ भरमार है, इसीलिए हिमालय हर किसी के चिंतन का विषय होना चाहिए। जहाँ तक ‘हिमालय की बात’ मंच को शुरू करने का सवाल है, तो इसके संयोजक बहुत छोटी उम्र से हिमालय की बात करते आ रहे हैं। पर्यावरण को बचाने के जन आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। देश के कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उन्होंने सेवाएँ दी और रचनात्मक लेख एवं स्तंभ लिखे। राजनीति, धर्म, संस्कृति, साहित्य, कला, शिल्प, राजस्व, खनन, आर्थिक विकास, आपदा प्रबंधन, तीर्थाटन, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, रोज़गार आदि कई अन्य विषयों पर उनके सुझाव प्रकाशित हुए। राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर के कई सेमिनारों में उन्होंने वक्ता के तौर पर भागीदारी की। पत्रकारिता और समाज सेवा के लिए उन्हें महत्वपूर्ण सम्मान हासिल हैं |
