
शक्ति की उपासना के महापर्व नवरात्रि से देश में नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स (Next Generation GST reforms) लागू हो जाएंगे। एक तरह से इस बार नवरात्रि महापर्व के अवसर पर जीएसटी (GST) बचत उत्सव शुरू होने जा रहा है। इस उत्सव की विशेषता यह है कि इसमें लोगों की बचत बढ़ेगी और वे अपनी पसंद की चीजों को और ज्यादा आसानी से खरीद पाएंगे। देश के गरीब, मध्यमवर्गीय लोग, युवा, किसान, महिलाएं, दुकानदार, व्यापारी, उद्यमी सभी को इस बचत उत्सव का बहुत लाभ मिलेगा। देश के हर परिवार की खुशियां बढ़ेंगी।
नवरात्रि की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब साल 2017 में भारत ने जीएसटी रिफॉर्म की ओर कदम बढ़ाया था तो एक पुराना इतिहास बदलने की और एक नया इतिहास रचने की शुरुआत हुई थी। दशकों तक हमारे देश की जनता, आप सभी लोग, व्यापारी, अलग-अलग टैक्स के जाल में उलझे हुए थे। भांति-भांति के दर्जनों टैक्स हमारे देश में थे। एक शहर से दूसरे शहर माल भेजना हो तो न जाने कितने चेक पोस्ट पार करने होते थे, कितने ही फॉर्म भरने पड़ते थे, कितनी सारी रुकावटें थीं, हर जगह, टैक्स के अलग-अलग नियम थे। लाखों कंपनियों को, लाखों-करोड़ों देशवासियों को अलग-अलग तरह के टैक्स के जाल की वजह से हर रोज परेशानी होती थी। सामान के एक शहर से दूसरे शहर पहुंचने के बीच जो खर्च बढ़ता था, वो भी गरीब को उठाना पड़ता था, आप जैसे ग्राहकों से वसूला जाता था।
देश को इस स्थिति से निकालना बहुत जरूरी था। इसलिए जब आपने हमें 2014 में अवसर दिया, तो हमने जनहित में, देशहित में जीएसटी को अपनी प्राथमिकता बनाया। हमने हर स्टेकहोल्डर से चर्चा की, हमने हर राज्यों की हर शंका का निवारण किया, हर सवाल का समाधान खोजा, सभी राज्यों को, सबको साथ लेकर आजाद भारत का इतना बड़ा टैक्स रिफॉर्म संभव हो पाया। ये केंद्र और राज्यों के प्रयासों का नतीजा था कि देश दर्जनों टैक्सों के जाल से मुक्त हुआ और पूरे देश के लिए एक जैसी व्यवस्था बनी। वन नेशन वन टैक्स का सपना साकार हुआ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रिफॉर्म एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया होती है। जब समय बदलता है, देश की जरूरत बदलती है, तो नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स भी उतने ही आवश्यक होते हैं। इसलिए देश की वर्तमान ज़रूरतों और भविष्य के सपनों को देखते हुए जीएसटी के ये नए रिफॉर्म्स लागू हो रहे हैं। नए स्वरूप में मुख्य रूप से अब सिर्फ पांच परसेंट और अठारह परसेंट के ही टैक्स स्लैब रहेंगे। इसका मतलब है, रोजमर्रा के इस्तेमाल की ज्यादातर चीजें और सस्ती हो जाएंगी। खाने-पीने का सामान, दवाइयां, साबुन, ब्रश, पेस्ट, स्वास्थ्य और जीवन बीमा, ऐसे अनेक सामान, अनेक सेवाएं या तो टैक्स-फ्री होंगी या फिर केवल पांच परसेंट टैक्स देना होगा।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में देश में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को हराया है। गरीबी से बाहर निकलकर के 25 करोड़ का एक बहुत बड़ा समूह नियो मिडिल क्लास के रूप में आज देश के अंदर बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। इस नियो मीडिल क्लास की अपनी आशाएं हैं, अपने सपने हैं। इस साल सरकार ने 12 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स फ्री करके एक उपहार दिया। स्वाभाविक है जब 12 लाख रुपए की इनकम टैक्स में राहत हो जाए तो मध्यम वर्ग के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आता है। कितनी सरलता, सुविधा हो जाती है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि दुकानदार भाई-बहन भी जीएसटी रिफॉर्म को लेकर बहुत उत्साह में हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमें आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलना ही होगा और भारत को आत्मनिर्भर बनाने का बहुत बड़ा दायित्व हमारे MSME’s (मैसमे) यानी हमारे लघु, मध्यम और कुटीर उद्योगों पर भी है। जो देश के लोगों की जरूरत का है, जो हम देश में ही बना सकते हैं, वो हमें देश में ही बनाना चाहिए। जीएसटी की दरें कम होने से, नियम और प्रक्रिया और आसान बनने से, हमारे MSMEs हमारे लघु उद्योगों को, कुटीर उद्योगों को बहुत फायदा होगा। उनकी बिक्री बढ़ेगी और टैक्स भी कम देना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की स्वतंत्रता को जैसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत मिली, वैसे ही देश की समृद्धि को भी स्वदेशी के मंत्र से ही शक्ति मिलेगी। हम वो सामान खरीदें, जो मेड इन इंडिया हो, जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी हो, हमारे देश के बेटे-बेटियों का पसीना हो। हमें हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाना है। हर दुकान को स्वदेशी से सजाना है। गर्व से कहो ये स्वदेशी है, गर्व से कहो, मैं स्वदेशी खरीदता हूं, मैं स्वदेशी सामान की बिक्री भी करता हूं, ये हर भारतीय का मिजाज बनना चाहिए। जब ये होगा, तो भारत तेज़ी से विकसित होगा। मेरा आज सभी राज्य सरकारों से भी आग्रह है, आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान के साथ, स्वदेशी के इस अभियान के साथ, अपने राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग को गति दें, पूरी ऊर्जा से, पूरे उत्साह से जुड़ें। निवेश के लिए माहौल बढ़ाएं, जब केंद्र और राज्य मिलकर आगे बढ़ेंगे तो आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा होगा, भारत का हर राज्य विकसित होगा, भारत विकसित होगा।
