देहरादून। शहर में दिवाली के अवसर पर एक के बाद एक करके आग लगने की खबरों ने प्रशासन के साथ ही आम लोगों को भी हैरान कर दिया। सोमवार 20 अक्टूबर की देर शाम से लेकर मंगलवार की सुबह तक सिर्फ साढ़े छह घंटे के भीतर आग लगने की 12 घटनाएं सामने आईं। गनीमत यह रही कि जन जागरूकता और फायर स्टेशन की तत्परता के कारण कहीं से जनहानि जैसा कोई अप्रिय समाचार नहीं आया।
आतिशबाजी को आग लगने की वजह बताया जा रहा है। दिवाली की रात 7:32 बजे से लेकर तड़के लगभग 2 बजे तक फायर स्टेशन को 12 कॉल मिलीं, जिनमें बताया गया कि पटाखों की वजह से आग लगी है। इन 12 घटनाओं में सबसे विकट स्थिति मेहूंवाला और निरंजनपुर मंडी में देखने को मिली। मेहूंवाला में प्लास्टिक के एक बड़े गोदाम में भीषण आग लग गई। प्लास्टिक की ज्वलनशीलता के कारण आग तेजी से फैली और इस पर काबू पाना दमकल विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। आग इतनी भयंकर थी कि दमकल विभाग को इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में डेढ़ घंटे का समय लग गया। इसके कारण प्लास्टिक से अत्यधिक मात्रा में निकला जहरीला धुआं और तेज गंध पूरे इलाके में फैल गई। इससे फायर फाइटिंग ऑपरेशन में जुटे कर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वहीं आसपास के लोगों को भी सांस लेने में काफी परेशानी हुई। निरंजनपुर मंडी में एक बिल्डिंग की छत पर भयानक आग लग गई। छत पर फलों के बक्से, लकड़ी का सामान, फल आदि को प्लास्टिक के तिरपाल-टेंट से ढककर रखा गया था। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह आग भी संभवतः प्लास्टिक पटाखों (जैसे स्काई शॉट) की वजह से लगी, जिसने तिरपाल को तुरंत पकड़ लिया। गनीमत यह रही कि बिल्डिंग के अंदर मौजूद लोग समय रहते बाहर आ गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
धर्मावाला में दुकान, जीएमएस रोड पर चलती कार, राजीव नगर में इलेक्ट्रिक फायर, नेहरू ग्राम में पोली हाउस, ओल्ड राजपुर रोड पर पेड़, सरस्वती बिहार के पास एक घर और कार में आग लगने जैसी अन्य 10 घटनाएं भी दर्ज की गईं।
