
केदारनाथ। हिमालय में स्थित भगवान शिव के धाम “केदारनाथ मंदिर ” के कपाट भाईदूज के पावन पर्व पर प्रातः 8:30 बजे विधिवत् पूजन के साथ बंद कर दिए गए हैं। सेना की बैंड धुन और जय बाबा केदार के जयघोष के साथ केदार बाबा की चल विग्रह पंचमुखी डोली ने मंदिर के सभामंडप से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। अब शीतकाल में यहीं केदारनाथ जी की पूजा होगी।
बाबा केदार की डोली के साथ हजारों भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। करीब दस हजार से अधिक श्रद्धालु मंदिर के कपाट बंद होने के साक्षी बने। बुधवार 22 अक्टूबर को केदारनाथ की चल विग्रह पंचमुखी डोली मंदिर के सभामंडप में विराजमान कर दी गई थी। कपाट बंद होने स पहले डोली को सभामंडप से बाहर लाया गया। इसके बाद डोली को मंदिर की परिक्रमा कराई गई। मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया विशेष पूजाओं के साथ सुबह चार बजे से शुरू हो गई थी।
केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की पूर्व संध्या पर गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी ने सपरिवार इस धाम में पूजा- अर्चना की, जबकि कपाट बंद होने के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौजूद रहे। इस वर्ष 17.39 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।
